विस्तृत उत्तर
वायुजा देह वह वायव्य स्वरूप है जिसे आत्मा मृत्यु के तत्काल बाद धारण करती है। यह देह अग्नि रहित शिखा के समान होती है और केवल वायु रूप में विचरण करती है। गरुड़ पुराण के अनुसार यह देह कर्म करने में अक्षम होती है। आत्मा बिना किसी आधार के वायुमंडल में घूमती है। इस देह में आत्मा स्थूल अन्न ग्रहण नहीं कर सकती, लेकिन उसकी भूख और प्यास असीम होती है। वह अपने पूर्व घर, शरीर और परिजनों के आसपास रहती है और उनसे संवाद करने का प्रयास करती है, पर सफल नहीं होती।
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