विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण और गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के तुरंत बाद आत्मा सीधे यमलोक नहीं जाती। वह अपने पूर्व निवास स्थान, अपने शरीर और अपने परिजनों के आसपास भटकती रहती है। वह परिजनों के क्रंदन और विलाप को सुनती है और उनसे संवाद करने का प्रयास करती है, परंतु वायुजा देह के कारण उसका कोई प्रयास सफल नहीं होता। मृत्यु के बाद आत्मा स्थूल शरीर छोड़कर सूक्ष्म अवस्था में रहती है और आगे पिण्डदान, श्राद्ध, सपिण्डीकरण तथा कर्मों के अनुसार उसकी गति तय होती है। यदि परिजन विधिपूर्वक पिण्डदान करते हैं, तो आत्मा के लिए पिण्डज शरीर बनता है, जिसके द्वारा वह आगे यममार्ग की यात्रा करती है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





