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विस्तृत उत्तर
वायुजा देह को अग्नि रहित शिखा के समान कहा गया है क्योंकि यह स्थूल पञ्चभौतिक शरीर नहीं होती, बल्कि वायव्य स्वरूप होती है। मृत्यु के तत्काल बाद आत्मा इसी देह को धारण करती है और केवल वायु रूप में विचरण करती है। यह देह कर्म करने में सर्वथा अक्षम होती है। आत्मा इस अवस्था में स्थूल अन्न नहीं ग्रहण कर सकती, पर उसमें भूख और प्यास रहती है। वह बिना किसी आधार के वायुमंडल में भटकती है।
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