विस्तृत उत्तर
पिण्डज शरीर वह पारलौकिक शरीर है जिसका निर्माण मृत्यु के बाद प्रथम दस दिनों में परिजनों द्वारा दिए गए पिण्डदान से होता है। दशगात्र के दौरान प्रतिदिन पिण्डदान किया जाता है और उसी से प्रेत के शरीर के अंग क्रमशः बनते हैं। पहले दिन सिर, दूसरे दिन गर्दन और कंधे, तीसरे दिन हृदय और वक्षस्थल, चौथे दिन पीठ, पाँचवें दिन नाभि, छठे दिन कटि और गुह्यांग, सातवें दिन जांघें, आठवें दिन घुटने, नौवें दिन पैर और दसवें दिन पूर्ण शरीर बनता है। इसी पिण्डज शरीर के माध्यम से आत्मा यमलोक की यात्रा करती है।
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