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विस्तृत उत्तर
मृत्यु के बाद आत्मा अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म स्वरूप धारण करती है और उसकी चेतना जागृत रहती है। इस अवस्था में मृत आत्मा संपूर्ण ब्रह्मांड और यमदूतों को देख सकती है। यदि वह पुण्यात्मा है, तो वह भगवान विष्णु के पार्षदों को भी स्पष्ट रूप से देख सकती है। यह पुण्यात्मा और पापी आत्मा की मृत्यु के बाद की अनुभूति में अंतर को दर्शाता है।
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