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विस्तृत उत्तर
वायुजा देह वायव्य स्वरूप होती है और कर्म करने में अक्षम रहती है। मृत्यु के बाद आत्मा इस देह में अपने परिजनों के आसपास रहती है। वह उनके क्रंदन और विलाप को सुनती है और उनसे संवाद करने का प्रयास करती है, परंतु वायुजा देह के कारण उसका कोई भी प्रयास सफल नहीं होता। उसके पास स्थूल शरीर नहीं होता, इसलिए वह स्थूल जगत में सामान्य मनुष्यों की तरह बोल या संपर्क नहीं कर सकती।
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