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परिजन से जुड़े सभी प्रश्न(6)

परिजन पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 6 प्रश्न उपलब्ध हैं।

मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा की दुर्गति या सद्गति किस पर निर्भर करती है?

आत्मा की सद्गति या दुर्गति उसके कर्मों और परिजनों द्वारा किए गए शास्त्रीय अन्त्येष्टि, पिण्डदान व महादान पर निर्भर करती है।

#दुर्गति#सद्गति#कर्म
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

13-दिनीय यात्रा में परिजनों की भूमिका क्या है?

परिजन विलाप से बचकर पिण्डदान, अन्न-जल, दीपदान, श्राद्ध, दान और सपिण्डीकरण से आत्मा की यात्रा में सहायता करते हैं।

#13 दिन#परिजन#पिण्डदान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद परिजनों के कर्म क्यों महत्वपूर्ण हैं?

परिजनों के अन्त्येष्टि, पिण्डदान, श्राद्ध, महादान और सपिण्डीकरण आत्मा की सद्गति तय करने में महत्वपूर्ण हैं।

#परिजन#मृत्यु के बाद कर्म#पिण्डदान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वायुजा देह में आत्मा परिजनों से बात क्यों नहीं कर पाती?

वायुजा देह कर्म-अक्षम और अस्थूल होती है, इसलिए आत्मा परिजनों से संवाद नहीं कर पाती।

#वायुजा देह#आत्मा#परिजन
जीवन एवं मृत्यु

प्रेत को कौन भूल जाता है?

प्रेत को भूल जाते हैं — व्यस्त और स्वार्थी परिजन, संपत्ति की लालसा में लिपत लोग, नास्तिक और अधर्मी, और वे जिन्हें श्राद्ध का महत्व ज्ञात नहीं। इसीलिए गरुड़ पुराण पाठ की परंपरा है।

#प्रेत#भूलना#परिजन
जीवन एवं मृत्यु

प्रेत को कौन याद करता है?

प्रेत को याद करते हैं — प्रेम करने वाले परिजन, पुत्र (श्राद्ध-कर्म से), पितृपक्ष में समस्त परिवार, करुणावान सज्जन जैसे राजा बभ्रुवाहन और स्वयं भगवान विष्णु।

#प्रेत#स्मरण#परिजन
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