मरणोपरांत आत्मा यात्रामृत्यु के बाद आत्मा की दुर्गति या सद्गति किस पर निर्भर करती है?आत्मा की सद्गति या दुर्गति उसके कर्मों और परिजनों द्वारा किए गए शास्त्रीय अन्त्येष्टि, पिण्डदान व महादान पर निर्भर करती है।#दुर्गति#सद्गति#कर्म
मरणोपरांत आत्मा यात्रा13-दिनीय यात्रा में परिजनों की भूमिका क्या है?परिजन विलाप से बचकर पिण्डदान, अन्न-जल, दीपदान, श्राद्ध, दान और सपिण्डीकरण से आत्मा की यात्रा में सहायता करते हैं।#13 दिन#परिजन
मरणोपरांत आत्मा यात्रामृत्यु के बाद परिजनों के कर्म क्यों महत्वपूर्ण हैं?परिजनों के अन्त्येष्टि, पिण्डदान, श्राद्ध, महादान और सपिण्डीकरण आत्मा की सद्गति तय करने में महत्वपूर्ण हैं।#परिजन#मृत्यु के बाद कर्म#पिण्डदान
मरणोपरांत आत्मा यात्रावायुजा देह में आत्मा परिजनों से बात क्यों नहीं कर पाती?वायुजा देह कर्म-अक्षम और अस्थूल होती है, इसलिए आत्मा परिजनों से संवाद नहीं कर पाती।#वायुजा देह#आत्मा#परिजन
जीवन एवं मृत्युप्रेत को कौन भूल जाता है?प्रेत को भूल जाते हैं — व्यस्त और स्वार्थी परिजन, संपत्ति की लालसा में लिपत लोग, नास्तिक और अधर्मी, और वे जिन्हें श्राद्ध का महत्व ज्ञात नहीं। इसीलिए गरुड़ पुराण पाठ की परंपरा है।#प्रेत#भूलना#परिजन
जीवन एवं मृत्युप्रेत को कौन याद करता है?प्रेत को याद करते हैं — प्रेम करने वाले परिजन, पुत्र (श्राद्ध-कर्म से), पितृपक्ष में समस्त परिवार, करुणावान सज्जन जैसे राजा बभ्रुवाहन और स्वयं भगवान विष्णु।#प्रेत#स्मरण#परिजन