विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में प्रेत को याद करने वालों का वर्णन श्राद्ध-परंपरा के संदर्भ में मिलता है।
प्रेम करने वाले परिजन — जो परिजन मृतक से गहरा प्रेम रखते थे, वे स्वाभाविक रूप से याद करते हैं। उनके रोने-बिलखने का वर्णन गरुड़ पुराण में है।
पुत्र — गरुड़ पुराण में पुत्र को 'पुत्' नरक से बचाने वाला कहा गया है। पुत्र द्वारा की गई क्रियाएँ — दशगात्र, षोडश श्राद्ध, सपिंडन — ये सब याद करने का व्यावहारिक रूप हैं।
पितृपक्ष में परिजन — पितृपक्ष (भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा से आश्विन अमावस्या) में समस्त हिंदू परंपरा के अनुसार अपने पितरों और प्रेतों को याद किया जाता है। 'पितर पितृपक्ष में धरती पर आते हैं और तर्पण की प्रतीक्षा करते हैं।'
धर्मपरायण लोग — गरुड़ पुराण में बभ्रुवाहन जैसे राजा का उदाहरण है जिन्होंने एक अनजान प्रेत को भी याद किया और उसके लिए दान-श्राद्ध किया।
भगवान विष्णु — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'भगवान विष्णु प्रेत को मोक्ष प्रदान करते हैं।' ईश्वर भी अपने भक्तों की आत्मा को याद करते हैं।





