विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में प्रेत को भूलने वालों का वर्णन एक चेतावनी के रूप में किया गया है।
व्यस्त और स्वार्थी परिजन — मृत्यु के बाद परिजन अपनी व्यस्तताओं में लग जाते हैं। गरुड़ पुराण के प्रथम अध्याय में वर्णन है — 'बंधु-बांधवों का रुदन सुनता हुआ वह जीव विलाप करता है।' परंतु कुछ समय बाद ये बंधु भी अपनी सांसारिक जीवन में लीन हो जाते हैं।
संपत्ति की चिंता में लिपत लोग — गरुड़ पुराण में यह भी संकेत है कि मृत्यु के बाद परिजन संपत्ति के बंटवारे में लग जाते हैं। 'पुत्रों को उनके द्वारा पूर्व संचित धन के विषय में तृष्णा नहीं करनी चाहिए' — यह कहा गया है।
नास्तिक और अधर्मी — गरुड़ पुराण में 'नास्तिक' का उल्लेख है जो श्राद्ध-पिंडदान की परंपरा को नहीं मानते।
ज्ञान-विहीन — जिन्हें यह ज्ञान ही नहीं कि श्राद्ध और पिंडदान क्यों जरूरी है, वे स्वाभाविक रूप से भूल जाते हैं।
गरुड़ पुराण का संदेश — यही कारण है कि यह पुराण 13 दिनों तक सुनाया जाता है — ताकि परिजन याद रखें और उचित कर्म करें।





