विस्तृत उत्तर
मृत्यु के बाद आत्मा सूक्ष्म वायवीय रूप धारण करती है, जिसे प्रेत कहा गया है। श्राद्ध से उसे यात्रा-सहायक देह मिलती है।
गरुड़ पुराण में प्रेत अवस्था क्या है को संदर्भ सहित समझें
गरुड़ पुराण में प्रेत अवस्था क्या है का सबसे सीधा सार यह है: मृत्यु के बाद की सूक्ष्म वायवीय अवस्था।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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गरुड़ पुराण के अनुसार भूलोक में किए कर्मों का परलोक से क्या संबंध है?
गरुड़ पुराण के अनुसार भूलोक में किए गए कर्म ही परलोक की यात्रा तय करते हैं। पाप से नर्क, पुण्य से स्वर्ग। भोग के बाद पुनः भूलोक में जन्म होता है।
भूलोक का संबंध मृत्यु के बाद की यात्रा से क्या है?
मृत्यु के बाद भूलोक में किए कर्मों के अनुसार स्वर्ग-नरक मिलता है लेकिन वहाँ का भोग पूरा होने पर पुनः भूलोक में ही लौटना पड़ता है। यहीं जन्म-मरण का चक्र तोड़ा जा सकता है।
विशुद्ध चक्र और महर्लोक का क्या संबंध है?
विशुद्ध चक्र महर्लोक का सूक्ष्म शारीरिक समकक्ष है। जैसे महर्लोक भौतिक और आध्यात्मिक लोकों के बीच सेतु है वैसे ही विशुद्ध चक्र निचले और उच्चतर चक्रों के बीच सेतु है।
गरुड़ पुराण में महर्लोक को कण्ठ क्यों कहा गया है?
गरुड़ पुराण के सूक्ष्म शरीर-विज्ञान में महर्लोक कण्ठ (गले) क्षेत्र में है। यह विशुद्ध चक्र का स्थान है जो उच्चतर चेतना और सत्य का मुख्य द्वार है।
पिण्ड-ब्रह्माण्ड सिद्धांत क्या है?
पिण्ड-ब्रह्माण्ड सिद्धांत कहता है — जो ब्रह्माण्ड में है वही मानव शरीर में भी है। देवता, लोक और नक्षत्र सभी शरीर के विभिन्न अंगों में सूक्ष्म रूप में विद्यमान हैं।
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