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त्रिपुरांतक से जुड़े सभी प्रश्न(5)

त्रिपुरांतक पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 5 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव रूप महिमा

शिव के त्रिपुरांतक रूप का वर्णन शिव पुराण में कैसे है

त्रिपुरांतक = तीन पुरों का अंत करने वाले। तीन असुर-पुत्रों के सोने-चाँदी-लोहे के तीन नगरों को शिव ने एक ही बाण से नष्ट किया। इसके बाद आनंद में शिव ने तांडव किया — यहीं से नृत्य का उद्भव माना जाता है।

#त्रिपुरांतक#त्रिपुरासुर#एक बाण
शिव अस्त्र-शस्त्र

शिव जी ने पिनाक धनुष से किसका वध किया था

शिव ने पिनाक धनुष से त्रिपुरासुर के तीन अभेद्य उड़नशील नगरों को एक ही बाण से भस्म किया। तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली का अंत हुआ — इसीलिए शिव 'त्रिपुरांतक' हैं।

#पिनाक#त्रिपुरासुर#त्रिपुरांतक
श्लोकों का अर्थ

चन्द्रशेखराष्टकम् में शिव के कौन से स्वरूपों का वर्णन है?

चन्द्रशेखराष्टकम् में त्रिपुरांतक, भस्माधारी, गजचर्मधारी, नीलकण्ठ, वृषभवाहन, भेषजम्, भक्तवत्सल और विश्व सृष्टि-पालन-संहार नियंत्रक — इन स्वरूपों का वर्णन है।

#शिव स्वरूप#त्रिपुरांतक#नीलकण्ठ
श्लोकों का अर्थ

चन्द्रशेखराष्टकम् में त्रिपुरांतक का क्या अर्थ है?

त्रिपुरांतक का अर्थ है तीनों पुरों (त्रिपुरासुर) को जलाने वाले — यह मन की अस्थिरता के मूल (अहंकार, कर्म, माया) के नाश का प्रतीक है।

#त्रिपुरांतक#तीन पुर#त्रिपुरासुर
श्लोकों का अर्थ

चन्द्रशेखराष्टकम् के पहले श्लोक में क्या वर्णन है?

पहले श्लोक में त्रिपुरांतक शिव का वर्णन है जिन्होंने मेरु धनुष, वासुकी प्रत्यंचा और विष्णु बाण से त्रिपुरासुर जलाया — 'मम किं करिष्यति वै यमः' (यमराज मेरा क्या करेगा)।

#पहला श्लोक#त्रिपुरांतक#मेरु धनुष
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