विस्तृत उत्तर
शिव पुराण की कथाओं के अनुसार त्रिशूल और पिनाक धनुष के निर्माणकर्ता स्वयं भगवान शिव ही हैं। पुराणों में यह स्पष्ट रूप से उल्लिखित है कि शिव ने अपने सभी प्रमुख अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण स्वयं किया था।
त्रिशूल शिव का स्वयंभू शस्त्र है — यह उनके साथ ही प्रकट हुआ। त्रिशूल तीन गुणों — सत्व, रज और तम — का प्रतीक है। यह तीनों कालों — भूत, भविष्य और वर्तमान — का भी द्योतक है। इसे शिव ने स्वयं अपनी दिव्य शक्ति से सिद्ध किया है।
कुछ परंपराओं में कहा गया है कि त्रिशूल का निर्माण देवशिल्पी विश्वकर्मा ने किया था, परंतु शिव पुराण की मान्यता के अनुसार शिव ही इसके मूल निर्माणकर्ता और अधिष्ठाता हैं।




