विस्तृत उत्तर
शिव पुराण और अन्य पुराणों में त्रिशूल का विस्तृत वर्णन मिलता है।
त्रिशूल की शक्ति — त्रिशूल भगवान शिव का सर्वाधिक अचूक और घातक शस्त्र है। इसके प्रयोग से कोई भी देव या दानव नहीं बच सकता। यह इतना शक्तिशाली है कि इसका प्रयोग करने पर यह स्वयं शिव और माता पार्वती को छोड़कर किसी भी चीज को नष्ट कर सकता है।
त्रिशूल के प्रयोग — शिव ने त्रिशूल से अंधकासुर, शंखचूड़ सहित अनेक दानवों का वध किया था। जलंधर-वध के प्रसंग में भी शिव ने त्रिशूल से ही जलंधर का संहार किया।
त्रिशूल का प्रतीकार्थ — शिव पुराण में त्रिशूल के तीन शूलों का गहरा अर्थ बताया गया है — यह तीन प्रकार के कष्टों (दैहिक, दैविक, भौतिक) के विनाश का प्रतीक है। साथ ही यह सत्व, रज, तम — तीन गुणों का और भूत, भविष्य, वर्तमान — तीन कालों का भी द्योतक है।
काशी और त्रिशूल — शिव पुराण में काशी को शिव के त्रिशूल पर स्थित बताया गया है। यह इस शस्त्र की दिव्यता और सर्वव्यापकता का प्रतीक है।




