विस्तृत उत्तर
रावण को चंद्रहास तलवार शिव की भक्ति से प्राप्त हुई। इसकी कथा शिव पुराण में वर्णित है।
कैसे मिली — रावण ने अपनी शक्ति के अहंकार में कैलाश पर्वत उठा लिया। शिव ने पैर के अंगूठे से कैलाश को दबाया जिससे रावण की अंगुलियाँ कुचल गईं। दर्द से छटपटाते हुए भी रावण ने उसी क्षण शिव की महिमा में 'शिव तांडव स्तोत्र' की रचना की। शिव उस स्तोत्र को सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुए।
वरदान — शिव ने रावण से पूछा — 'क्या वरदान चाहते हो?' रावण ने अजेयता माँगी। प्रसन्न शिव ने रावण को तीन उपहार दिए — 'चंद्रहास' नामक दिव्य खड्ग, अजेयता का वरदान और 'रावण' नाम।
चेतावनी — शिव ने चंद्रहास देते समय स्पष्ट कहा — 'यदि इसका गलत उपयोग करोगे तो यह तलवार वापस मेरे पास आ जाएगी।' यह चेतावनी बाद में सत्य हुई जब रावण ने सीता-हरण में जटायु के पंख काटे।





