विस्तृत उत्तर
शिव जी के धनुष का नाम 'पिनाक' है। इसी कारण शिव को 'पिनाकी' भी कहते हैं — अर्थात पिनाक धारण करने वाले।
पिनाक धनुष इतना शक्तिशाली था कि इसकी प्रत्यंचा की टंकार मात्र से आकाश फट जाता था, बादल गरज उठते थे और पर्वत काँपने लगते थे। इसे संसार का सबसे शक्तिशाली धनुष माना गया है।
शिव ने इसी पिनाक धनुष से त्रिपुरासुर की तीनों दुर्जेय नगरियों को एक ही बाण से भस्म किया था।
पिनाक धनुष को बाद में देवताओं के माध्यम से राजा जनक के पूर्वज देवरात को सौंप दिया गया। यही धनुष त्रेतायुग में सीता के स्वयंवर में राखा गया था और भगवान श्रीराम ने इसे उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाते समय तोड़ दिया।





