विस्तृत उत्तर
पाशुपतास्त्र की उत्पत्ति के विषय में पुराणों में यह वर्णित है कि यह भगवान शिव का अपना दिव्यास्त्र है।
पाशुपतास्त्र की उत्पत्ति — पुराणिक ग्रंथों के अनुसार पाशुपतास्त्र को शिव ने ब्रह्माण्ड की सृष्टि से पहले ही घोर तप करके आदि पराशक्ति से प्राप्त किया था। यह अस्त्र शिव, काली और आदि परा शक्ति का संयुक्त हथियार है।
यह अस्त्र भगवान शिव की अपनी आत्मशक्ति से निर्मित और सिद्ध है। इसीलिए यह 'पशुपति' (शिव) का अस्त्र कहलाता है।
महाभारत में — शिव ने यह अस्त्र किरात रूप में अर्जुन को दिया। देते समय शिव ने कहा — 'यह अस्त्र किसी भी मनुष्य, देवता, देवराज, यम, यक्ष, वरुण — किसी के भी पास नहीं है।'
परंपरागत रूप से इसे शिव का स्वयं-सिद्ध अस्त्र माना जाता है — इसका निर्माण किसी शिल्पी ने नहीं, बल्कि शिव की दिव्य शक्ति से हुआ है।





