विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड में शिवजी के धनुष की उत्पत्ति का विस्तृत वर्णन नहीं है। यह धनुष राजा जनक के पास पूर्वजों से चला आ रहा था।
पुराणों और वाल्मीकि रामायण के अनुसार यह धनुष भगवान शिवजी का था जो उन्होंने दक्ष यज्ञ विध्वंस के समय धारण किया था। बाद में यह देवताओं के माध्यम से जनक वंश में आया। राजा जनक ने इसकी पूजा करते थे और सीताजी बचपन में इसे खेल-खेल में उठा लेती थीं — इसी से जनक ने प्रतिज्ञा की।
बालकाण्ड की सोरठा — 'संकर चापु जहाजु सागरु रघुबर बाहुबलु' — शिवजीका धनुष जहाज है और श्रीरामचन्द्रजीकी भुजाओंका बल समुद्र है।





