विस्तृत उत्तर
कैलाश पर्वत का महत्व शिव पुराण और स्कंद पुराण में विस्तार से वर्णित है:
भौगोलिक परिचय
- ▸स्थान: तिब्बत (वर्तमान चीन), हिमालय क्षेत्र में
- ▸ऊँचाई: 6,638 मीटर
- ▸पास में: मानसरोवर झील और राक्षस ताल
- ▸विशेषता: कभी नहीं चढ़ा गया — कोई पर्वतारोही इसे फतह नहीं कर सका
शास्त्रीय महत्व
शिव पुराण में कैलाश को 'शिव का नित्य निवास' कहा गया है। शिव यहाँ पार्वती के साथ नित्य विराजमान हैं। यह स्थान मृत्युलोक और देवलोक के मध्य है।
मानसरोवर का महत्व
मानसरोवर = 'मानस' (ब्रह्मा का मन) + 'सरोवर' (झील)। ब्रह्मा के मन से उत्पन्न यह झील सर्वपवित्र है। इसमें स्नान से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं।
कैलाश परिक्रमा
कैलाश की 52 किलोमीटर की परिक्रमा अत्यंत पुण्यकारी मानी जाती है:
- ▸एक परिक्रमा = 1 जन्म के पापों का नाश
- ▸13 परिक्रमा = कई जन्मों के पापों का नाश
- ▸108 परिक्रमा = मोक्ष
कैलाश के चार मुख
शिव पुराण में कैलाश के चार मुखों का उल्लेख है:
- ▸पूर्व — क्रिस्टल (स्फटिक)
- ▸पश्चिम — माणिक्य
- ▸उत्तर — स्वर्ण
- ▸दक्षिण — लापिस लाजुली (नीलम)
रावण और कैलाश
शिव पुराण में प्रसिद्ध कथा — रावण ने कैलाश को उठाने का प्रयास किया। शिव ने अंगूठे से दबाया। रावण ने शिव तांडव स्तोत्र गाया और मुक्त हुए।
आधुनिक महत्व
कैलाश पर्वत पर अनेक वैज्ञानिक शोध हुए हैं। इसके आकार और चुंबकीय क्षेत्र को लेकर विभिन्न शोधकर्ताओं ने रुचि दिखाई है — हालांकि इन्हें पूर्णतः सिद्ध नहीं माना जाता।





