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विस्तृत उत्तर
अर्जुन को वरुणास्त्र का ज्ञान गुरु द्रोणाचार्य और स्वयं वरुण देव दोनों से प्राप्त हुआ था। यह अर्जुन की असाधारण योग्यता और विभिन्न स्रोतों से ज्ञान प्राप्त करने की उनकी क्षमता को दर्शाता है। यह तथ्य गुरु-शिष्य परंपरा और ज्ञान के हस्तांतरण के महत्व को भी दर्शाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार दिव्यास्त्र प्राप्त करने के लिए साधक को कठोर तपस्या, अटूट गुरुभक्ति, मानसिक एकाग्रता और इंद्रिय-निग्रह का प्रदर्शन करना होता था।
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