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विस्तृत उत्तर
रामायण में इंद्रास्त्र का प्रयोग बहुत कम लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक क्षणों में किया गया। जब रावण का विशालकाय भाई कुंभकर्ण युद्ध के मैदान में उतरा तो उसने वानर सेना में हाहाकार मचा दिया। उसका आकार इतना बड़ा और शक्ति इतनी अधिक थी कि उसे रोकना असंभव लग रहा था। तब भगवान श्री राम ने इस अजेय राक्षस का सामना करने के लिए इंद्रास्त्र का आह्वान किया। इंद्रास्त्र के दिव्य बाणों ने कुंभकर्ण की एक विशाल भुजा को काट कर अलग कर दिया।
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