विस्तृत उत्तर
समुद्र मंथन में ब्रह्मा जी की भूमिका देवताओं को सही मार्ग पर ले जाने वाली थी। जब देवता दुर्वासा ऋषि के श्राप से कमजोर होकर असुरों से पराजित हुए, तब वे ब्रह्मा जी के पास गए। ब्रह्मा जी ने समझा कि यह संकट साधारण शक्ति से हल नहीं होगा। उन्होंने देवताओं को भगवान विष्णु की शरण में जाने को कहा और स्वयं भी देवताओं तथा शिव जी के साथ क्षीरसागर गए। वहाँ सबने विष्णु की स्तुति की। इस प्रकार ब्रह्मा जी ने देवताओं को परम समाधान यानी विष्णु की योजना तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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