अघोर उपासनाप्राणायाम और ध्यान से शिव की उपासना कैसे बताई गई है?ध्यानयुक्त मन, प्राणायाम और हृदय में महेश्वर को धारण करके अघोररूप परमेश्वर की शरण लेना उपासना रूप में बताया गया है।#प्राणायाम#ध्यान#उपासना
ब्रह्मा और अघोरब्रह्मा ने अघोर शिव की शरण कैसे ली?ब्रह्मा ने अघोर शिव को महादेव जानकर प्रणाम किया, प्राणायाम और ध्यान से महेश्वर को हृदय में धारण किया और उनकी शरण ली।#ब्रह्मा#अघोर#शरणागति
ब्रह्मा और अघोरब्रह्मा का वर्ण काला कैसे हुआ?प्रजासृष्टि की इच्छा से चिंतनमग्न और पुत्रकामना से ध्यानरत होने पर ब्रह्मा का वर्ण काला बताया गया है।#ब्रह्मा#कृष्णवर्ण#ध्यान
ब्रह्मा और अघोरब्रह्मा ने प्रजा-सृष्टि के लिए क्या किया?ब्रह्मा प्रजासृष्टि की इच्छा से दुःखित होकर विचारमग्न हुए और पुत्र की कामना से ध्यान करने लगे।#ब्रह्मा#प्रजासृष्टि#चिंतन
असित कल्पसृष्टि से पहले क्या स्थिति बताई गई है?प्रजासृष्टि से पहले एक हजार दिव्य वर्षों तक सर्वत्र जल ही जल व्याप्त बताया गया है।#सृष्टि#जल#प्रजासृष्टि
असित कल्पअसित कल्प क्या है?असित कल्प पीतकल्प के बीत जाने के बाद प्रवृत्त ब्रह्मा का दूसरा कल्प बताया गया है।#असित कल्प#कल्प#ब्रह्मा
अघोर महिमाअघोर शिव कौन हैं?अघोर शिव असित कल्प में कृष्णवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए महादेव हैं, जिन्हें ब्रह्मा ने देवदेवेश और ब्रह्मस्वरूप माना।#अघोर#शिव#महादेव
महादेव का वरमहादेव ने ब्रह्मा को कौन-कौन से वर दिए?महादेव ने ब्रह्मा को दिव्य योग, महान् कीर्ति, ऐश्वर्य, ज्ञानसम्पदा और वैराग्य प्रदान किया।#महादेव#ब्रह्मा#दिव्य योग
पीतवासा कल्पपीतवासा कल्प क्या है?पीतवासा कल्प इकतीसवाँ कल्प बताया गया है, जिसमें ब्रह्मा ने पीला वस्त्र धारण किया था।#पीतवासा कल्प#कल्प#ब्रह्मा
वामदेव कुमारविरजा, विबाहु, विशोक और विश्वभावन कौन थे?विरजा, विबाहु, विशोक और विश्वभावन ब्रह्मा के चार कुमार थे, जो विशुद्ध आत्मा और ब्रह्मतेज से सम्पन्न बताए गए हैं।#विरजा#विबाहु#विशोक
ब्रह्मा और वामदेवब्रह्मा को कल्प-कल्प में परमेश्वर को जानने का वर कैसे मिला?ब्रह्मा ने ध्यान और परम भक्ति से वामदेव शिव का स्तवन किया, इसलिए उन्हें कल्प-कल्प में परमेश्वर को जानने का वर मिला।#ब्रह्मा#कल्प-कल्प#परमेश्वर
ब्रह्मा और वामदेववामदेव शिव ने ब्रह्मा को क्या वर दिया?वामदेव शिव ने ब्रह्मा से कहा कि वे ध्यानबल से कल्प-कल्प में उन्हें सर्वश्रेष्ठ और लोकाधार परमेश्वर रूप में जानेंगे।#वामदेव#ब्रह्मा#वर
वामदेव स्तुतिवामदेवाय मंत्र का क्या महत्व बताया गया है?वामदेवाय मन्त्र को ब्रह्म कहा गया है और ब्रह्मा ने उसे पूर्व में लगाकर परम भक्ति से शिव की स्तुति की।#वामदेवाय मंत्र#वामदेव#शिव स्तुति
वामदेव स्तुतिवामदेव शिव की स्तुति कैसे की गई?ब्रह्मा ने परम भक्ति से ब्रह्म अर्थात् वामदेवाय मन्त्र को पूर्व में लगाकर अनेक स्तुतियों से वामदेव शिव का स्तवन किया।#वामदेव स्तुति#ब्रह्मा#वामदेवाय मंत्र
ब्रह्मा और वामदेवब्रह्मा को ध्यान में लाल कुमार के रूप में कौन दिखाई दिए?ब्रह्मा को ध्यान में लाल कुमार के रूप में वामदेव शिव दिखाई दिए, जिन्हें उन्होंने साक्षात् देवेश्वर जाना।#ब्रह्मा#ध्यान#लाल कुमार
वामदेव रूपरक्तकल्प क्या है और इसमें शिव का कौन सा रूप प्रकट हुआ?रक्तकल्प तीसवाँ कल्प बताया गया है, जिसमें शिव वामदेव रूप से रक्तवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए।#रक्तकल्प#वामदेव#शिव रूप
ब्रह्मा और सद्योजातब्रह्मा ने सद्योजात शिव को परमेश्वर कैसे माना?ब्रह्मा ने ध्यानयोग से सद्योजात कुमार को साक्षात् परमेश्वर जाना, प्रणाम किया और परात्पर ब्रह्म माना।#ब्रह्मा#सद्योजात#परमेश्वर
सद्योजात महिमाशिव का श्वेतलोहित रूप क्या है?शिव का श्वेतलोहित रूप शिखाधारी श्वेतलोहित कुमार के रूप में प्रकट हुआ, जिसे ब्रह्मा ने परमेश्वर जाना।#श्वेतलोहित#सद्योजात#कुमार
ब्रह्मा और सद्योजातब्रह्मा ने शिव को कुमार रूप में कैसे देखा?ब्रह्मा समाधिस्थ होकर परमेश्वर का ध्यान कर रहे थे, तभी उन्होंने शिखाधारी श्वेतलोहित कुमार को देखा।#ब्रह्मा#कुमार रूप#सद्योजात
सद्योजात महिमासद्योजात रूप में शिव कैसे प्रकट हुए?जब ब्रह्मा समाधि में परमेश्वर का ध्यान कर रहे थे, तब शिखाधारी श्वेतलोहित कुमार प्रकट हुआ, जिसे सद्योजात माना गया।#सद्योजात#शिव प्रकट#श्वेतलोहित कुमार
श्रद्धा और शिवदर्शनब्रह्मा को शिव ने भक्तिभाव कैसे दिया?ब्रह्मा ने हृदय में शिव को देखा और अचल भक्ति माँगी; शिव ने उन्हें वह भक्तिभाव प्रदान किया।#ब्रह्मा#भक्तिभाव#अचल भक्ति
श्रद्धा और शिवदर्शनशिवलिंग में ध्यान क्यों बताया गया है?क्योंकि शिव ने स्वयं कहा कि ब्रह्मा और विष्णु द्वारा देखे गए लिंग में ही सबको उनका ध्यान करना चाहिए।#शिवलिंग#ध्यान#श्रद्धा
श्रद्धा और शिवदर्शनशिव का ध्यान कहाँ करना चाहिए?शिव ने कहा कि ब्रह्मा और विष्णु ने समुद्र में जिस लिंग का दर्शन किया था, उसी में उनका ध्यान करना चाहिए।#शिव ध्यान#लिंग#श्रद्धा
ब्रह्मा और शिव संवादब्रह्मा ने शिव का दर्शन कैसे किया?ब्रह्मा ने गायत्री-उपासना से शिव का दर्शन किया और उसी भक्ति से दर्शन प्राप्त होना बताया गया।#ब्रह्मा#शिव दर्शन#गायत्री उपासना
ब्रह्मा और शिव संवादब्रह्मा ने शिव से क्या पूछा था?ब्रह्मा ने पूछा कि शिव किस प्रकार वश में होते हैं और उनका ध्यान कहाँ करना चाहिए।#ब्रह्मा#शिव#महादेव
श्रद्धा और शिवदर्शनशिव दर्शन किस साधन से मिलता है?शिव दर्शन श्रद्धा से मिलता है; ब्रह्मा ने गायत्री-उपासना से शिव का दर्शन किया था।#शिव दर्शन#श्रद्धा#भक्ति
श्रद्धा और शिवदर्शनशिव को कौन सा साधन वश में करता है?शिव ने कहा कि वे केवल श्रद्धा से वश में किये जा सकते हैं।#शिव वश#श्रद्धा#भक्ति
शिवभक्तिब्रह्मा, विष्णु और देवताओं को उत्तम पद कैसे मिला?ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र और अन्य देवता शिवभक्ति से ही उत्तम पद को प्राप्त हुए।#ब्रह्मा#विष्णु#इन्द्र
शैव पद और वैराग्यवैष्णव पद क्या बताया गया है?ब्राह्म ऐश्वर्य के तत्त्वों को प्रधानसम्बन्धी वैष्णव पद बताया गया है।#वैष्णव पद#ब्राह्म ऐश्वर्य#प्रधान
नरक और महादेवमहादेव गुणों के अनुसार कौन-कौन से रूप धारण करते हैं?तमोगुण प्रधान होने पर वे कालरुद्र, रजोगुण प्रधान होने पर ब्रह्मा, सत्त्वगुण प्रधान होने पर विष्णु और गुणरहित होने पर महेश्वर रूप बताए गए हैं।#महादेव#तमोगुण#रजोगुण
सृष्टिस्थावर-जंगम जगत क्या है?स्थावर-जंगम जगत वही सम्पूर्ण जगत है जिसे ब्रह्मा ने जरा-मरण से युक्त बनाया।#स्थावर जंगम#जगत#ब्रह्मा
सृष्टिमृत्यु वाली सृष्टि किसने बनाई?शंकर की आज्ञा पाकर चतुरानन ब्रह्मा ने जरा-मरण से युक्त स्थावर-जंगम जगत की रचना की।#मृत्यु वाली सृष्टि#ब्रह्मा#जरा
सृष्टिशिव ने मरणधर्मा सृष्टि पर क्या उत्तर दिया?शिव ने कहा कि मरणधर्मा सृष्टि करना उनकी स्थिति नहीं है; ब्रह्मा अपने इच्छानुसार मृत्युयुक्त प्रजा बनाएं।#शिव#शंकर#मरणधर्मा सृष्टि
सृष्टिब्रह्मा ने शिव से कैसी प्रजा बनाने को कहा?ब्रह्मा ने शिव से मरणधर्मा प्रजा बनाने को कहा, क्योंकि अमर प्रजा की सृष्टि उचित नहीं बताई।#ब्रह्मा#शिव#मरणधर्मा प्रजा
रुद्र उत्पत्तिब्रह्मा ने रुद्रों की स्तुति कैसे की?ब्रह्मा ने नीललोहित रुद्रों को त्रिनेत्रधारी, सर्वज्ञ, सर्वव्यापी, नित्य, निर्मल, विश्वात्मा और शिवजी के आत्मज कहकर प्रणाम किया।#ब्रह्मा#रुद्र स्तुति#नीललोहित
रुद्र उत्पत्तिनीललोहित महादेव ने क्या उत्पन्न किया?नीललोहित महादेव ने ब्रह्मा की प्रार्थना पर अपने तुल्य अनेक रुद्र उत्पन्न किये।#नीललोहित#महादेव#रुद्र
सती और रुद्रपुत्री को पुन्नामक नरक से रक्षा करने वाली क्यों कहा गया?ब्रह्मा ने दक्ष से सती की सेवा करने को कहा और पाठ में पुत्री को पुन्नामक नरक से रक्षा करने वाली बताया गया।#पुत्री#पुन्नामक नरक#सती
सती और रुद्रअर्धनारीश्वर से स्त्री-पुरुष विभाग कैसे हुआ?ब्रह्मा ने सृष्टि के आरम्भ में शिव को अर्धनारीश्वर देखकर स्त्री-पुरुष विभाग करने को कहा, तब शिव की देह से सती अलग हुईं।#अर्धनारीश्वर#शिव#सती
सती और रुद्रसती दक्ष की पुत्री कैसे बनीं?सती शिवसम्भवा मानसी पुत्री थीं; ब्रह्मा ने दक्ष से कहा कि अबसे यह सती तुम्हारी पुत्री होगी।#सती#दक्ष#शिवसम्भवा
मनु और शतरूपास्वायम्भुव मनु और शतरूपा कौन थे?स्वायम्भुव मनु और रानी शतरूपा का सृजन ब्रह्मा ने किया; शतरूपा अयोनिजा और पुण्यशालिनी कही गई हैं।#स्वायम्भुव मनु#शतरूपा#ब्रह्मा
ऋषि और मानस पुत्रऋभु और सनत्कुमार कौन थे?ऋभु और सनत्कुमार ब्रह्मा के अग्रजन्मा दिव्य पुत्र थे, जिन्हें नैष्ठिक ब्रह्मचारी और ब्रह्मवादी कहा गया है।#ऋभु#सनत्कुमार#नैष्ठिक ब्रह्मचारी
ऋषि और मानस पुत्रसनकादि मुनियों ने परमपद कैसे प्राप्त किया?सनकादि मुनियों ने निष्काम कर्मयोग से परमपद प्राप्त किया।#सनकादि#निष्काम कर्मयोग#परमपद
ऋषि और मानस पुत्रसनक, सनन्दन और सनातन कौन थे?सनक, सनन्दन और सनातन ब्रह्मा द्वारा उत्पन्न श्रेष्ठ मुनि थे; सनत्कुमार का भी उल्लेख साथ आता है।#सनक#सनन्दन#सनातन
सर्गत्रिगुणात्मक चिंतन का क्या मतलब है?त्रिगुणात्मक चिंतन का अर्थ सत्त्व, रज और तमोगुण से युक्त चिंतन बताया गया है।#त्रिगुणात्मक#सत्त्व#रज
अविद्याब्रह्मा की पहली सृष्टि अविद्या से ग्रस्त क्यों कही गई?पहली सृष्टि अविद्या से ग्रस्त कही गई क्योंकि सृष्टि-विचार सम्यक विचार के बिना हुआ और ब्रह्मा को मोह ने व्याप्त कर लिया।#ब्रह्मा#पहली सृष्टि#अविद्या
अविद्यापंचपर्वा अविद्या क्या है?पंचपर्वा अविद्या वे पांच अविद्याएँ हैं जो ब्रह्मा से पहले उत्पन्न हुईं: तम, मोह, महामोह, तामिस्र और अन्धतामिस्र।#पंचपर्वा अविद्या#अविद्या#तम
सृष्टि आरम्भब्रह्मा ने भू भुव स्व मह लोकों की रचना कैसे की?पृथ्वी को पुनः व्यवस्थित करने के बाद ब्रह्मा ने भू आदि चार लोकों की पूर्ववत् रचना की।#भू#भुव#स्व
सृष्टि आरम्भपृथ्वी को फिर से कैसे स्थापित किया गया?ब्रह्मा ने पृथ्वी को निकालकर पूर्ववत् स्थापित किया, नदी-समुद्र बनाए और दबे-उठे भागों को समतल किया।#पृथ्वी स्थापना#ब्रह्मा#वाराह
सृष्टि आरम्भजल में डूबी पृथ्वी को किसने निकाला?जल में डूबी पृथ्वी को सनातन ब्रह्मा ने वाराह रूप धारण करके निकाला।#पृथ्वी#जल#ब्रह्मा
सृष्टि आरम्भब्रह्मा ने वाराह रूप क्यों धारण किया?ब्रह्मा ने जल में डूबी पृथ्वी को निकालकर फिर से स्थापित करने के लिए वाराह रूप धारण किया।#ब्रह्मा#वाराह रूप#पृथ्वी उद्धार