विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु दिक् और काल के भीतर बँधी वस्तु नहीं हैं। इसलिए ब्रह्मा उन्हें बाहरी यात्रा और इंद्रिय-आधारित खोज से नहीं पा सके।
ब्रह्मा जी विष्णु को क्यों नहीं खोज पाए को संदर्भ सहित समझें
ब्रह्मा जी विष्णु को क्यों नहीं खोज पाए का सबसे सीधा सार यह है: क्योंकि विष्णु इंद्रियों से खोजे जाने वाली वस्तु नहीं हैं।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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महर्लोक के निवासियों का 'दर्शन' (Vision) कैसा होता है?
दर्शन का अर्थ है परब्रह्म परमात्मा का प्रत्यक्ष, स्पष्ट और निर्बाध दर्शन। महर्लोक के ऋषियों को यह दिव्य दर्शन निरंतर और बिना किसी व्यवधान के होता रहता है।
प्रत्यक्ष और परोक्ष में क्या फर्क है?
प्रत्यक्ष इंद्रियों से, परोक्ष इंद्रियों से परे स्रोत से मिलता है।
सत्यलोक में ब्रह्मा के साथ मोक्ष और महर्लोक से पुनर्जन्म में क्या अंतर है?
जो ऋषि महर्लोक से सत्यलोक पहुँचकर ब्रह्मा के साथ वैकुंठ में प्रवेश करते हैं उन्हें पूर्ण मोक्ष मिलता है। जो नहीं पहुँच पाते वे नई सृष्टि में पुनः सृष्टि चक्र में आते हैं।
नैमित्तिक प्रलय में स्वर्लोक का क्या होता है?
नैमित्तिक प्रलय में ब्रह्मा के एक दिन (कल्प) के अंत में संवर्तक अग्नि से स्वर्लोक भी भस्म हो जाता है। तब स्वर्लोक के निवासी महर्लोक या जनलोक चले जाते हैं।
पुष्कर द्वीप में ब्रह्मा जी का आसन कैसा है?
पुष्कर द्वीप में 10 करोड़ पंखुड़ियों वाला विशाल स्वर्ण कमल है जो ब्रह्मा जी का आसन है। यहाँ मानसोत्तर पर्वत पर इन्द्र, यम, वरुण और चंद्र की राजधानियाँ हैं।
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