विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा जी ने अपने स्रष्टा को जानने और सृष्टि-रचना का ज्ञान पाने के लिए तपस्या की। तप से उनका चित्त शुद्ध हुआ।
ब्रह्मा जी ने तपस्या क्यों की को संदर्भ सहित समझें
ब्रह्मा जी ने तपस्या क्यों की का सबसे सीधा सार यह है: उन्होंने स्रष्टा और सृष्टि-ज्ञान पाने के लिए तपस्या की।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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गणेश जी की पूजा से बुद्धि कैसे बढ़ती है?
गणेश = ज्ञानमय (अथर्वशीर्ष)। स्वरूप: बड़ा सिर=बुद्धि, बड़े कान=ज्ञान ग्रहण, एक दांत=एकाग्रता। मूलाधार चक्र अधिपति → कुण्डलिनी → बुद्धि चक्र सक्रिय। बुध ग्रह संबंधित → बुद्धि कारक। उपाय: 108 जप, दूर्वा, अथर्वशीर्ष, बुधवार व्रत।
अश्वत्थामा को पर्जन्यास्त्र का ज्ञान कहाँ से मिला?
अश्वत्थामा को पर्जन्यास्त्र का ज्ञान अपने पिता गुरु द्रोणाचार्य से प्राप्त हुआ था। यह उनके विशाल दिव्यास्त्र संग्रह का हिस्सा था।
द्रोणाचार्य को आग्नेयास्त्र कहाँ से मिला?
द्रोणाचार्य को आग्नेयास्त्र की शिक्षा महर्षि अग्निवेश से प्राप्त हुई थी। यह ज्ञान आगे द्रोणाचार्य से अर्जुन और अश्वत्थामा तक पहुंचा।
दक्षिणामूर्ति शिव की उपासना का क्या महत्व है?
दक्षिणामूर्ति = शिव का परम गुरु स्वरूप। दक्षिणामूर्ति उपनिषद् (यजुर्वेद): 24 अक्षर मंत्र। शंकराचार्य स्तोत्र: अद्वैत सार, 'मोक्ष शास्त्र'। मौन गुरु — वृद्ध शिष्यों के संशय छिन्न। गुरु न मिले तो इन्हें गुरु मानें। गुरुवार/गुरु पूर्णिमा विशेष। विद्यार्थियों के लिए बुद्धि वृद्धि।
ध्यान में चिन मुद्रा और ज्ञान मुद्रा में क्या अंतर है?
हथेली ऊपर = ज्ञान (ग्रहण/expansive)। नीचे = चिन (संरक्षण/grounding)। दोनों: अंगूठा+तर्जनी = आत्मा+जीव मिलन। जो comfortable = वही।
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