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विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण में वर्णन है कि जब ब्रह्मा जी सृष्टि रच रहे थे, तब उनके पृष्ठ भाग से पितरों की उत्पत्ति हुई। पितरों की उत्पत्ति के बाद ब्रह्मा जी ने वह शरीर त्याग दिया और वही शरीर कालांतर में संध्या बन गया। इसलिए पितरों का संध्या काल से विशेष संबंध माना गया है और उनकी सत्ता देवताओं के समतुल्य पूजनीय कही गई है।
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