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विस्तृत उत्तर
योगोपनिषदों और तांत्रिक शास्त्रों के अनुसार तपोलोक मनुष्य के भ्रूमध्य, अर्थात दोनों भौहों के बीच स्थित आज्ञा चक्र से गहराई से संबंधित है। आज्ञा चक्र को योगशास्त्र में तृतीय नेत्र भी कहा जाता है। यह वह स्थान है जहाँ योगी ध्यान के समय अपनी संपूर्ण प्राण ऊर्जा और चित्त-वृत्ति को एकाग्र करता है। चूँकि तपोलोक तपस्या, ज्ञान, वैराग्य और विशुद्ध चेतना का लोक है, इसलिए शरीर में इसका स्थान आज्ञा चक्र या ललाट बताया गया है।
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