विस्तृत उत्तर
तिलक लगाना पूजा का अनिवार्य अंग माना जाता है — यद्यपि कठोर बाध्यता नहीं।
महत्व
- 1आज्ञा चक्र सक्रियता — भ्रूमध्य (तीसरा नेत्र) पर तिलक = आज्ञा चक्र उत्तेजित; एकाग्रता, आध्यात्मिक ऊर्जा।
- 2ईश्वर चिह्न — माथे पर ईश्वर का चिह्न = भक्त की पहचान।
- 3रक्षा — तिलक सकारात्मक ऊर्जा रक्षक (मान्यता)।
- 4संप्रदाय पहचान — ऊर्ध्वपुंड्र (विष्णु), त्रिपुंड्र (शिव), बिंदी (देवी)।
प्रकार
- ▸चंदन — शीतल, सात्विक।
- ▸कुमकुम/रोली — शक्ति, सौभाग्य।
- ▸भस्म (विभूति) — शिव; वैराग्य।
- ▸गोपी चंदन — वैष्णव।
जरूरी है क्या: शास्त्रीय पूजा में तिलक अनिवार्य अंग। परंतु यदि न लगाएं तो पूजा व्यर्थ नहीं — भाव सर्वोपरि। बाहर जाने में असुविधा हो तो छोटा बिंदु भी पर्याप्त।





