विस्तृत उत्तर
भस्मासुर पार्वती जी को पाना चाहता था क्योंकि वरदान मिलते ही उसके भीतर काम, अहंकार और सत्ता की लालसा बढ़ गई। उसने शिव जी को अपने मार्ग की बाधा समझा। उसे लगा कि यदि वह शिव जी को भस्म कर देगा, तो पार्वती जी को प्राप्त कर सकता है और स्वयं को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर सकता है। यह विचार उसकी घोर अधार्मिक और आसुरी वृत्ति को दिखाता है। पार्वती जी जगन्माता हैं, कोई भोग की वस्तु नहीं। भस्मासुर का यही विकृत भाव उसके विनाश का कारण बना। कथा बताती है कि शक्ति की इच्छा यदि धर्महीन हो, तो वह व्यक्ति को स्वयं भस्म कर देती है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक

