विस्तृत उत्तर
जालंधर ने शिव का रूप छल और वासना के कारण लिया। युद्धभूमि में उसे समझ आ गया था कि बल से शिव को हराना असंभव है। इसलिए उसने अपनी आसुरी माया का प्रयोग किया। पहले उसने गांधर्व माया से संगीत और अप्सराओं का भ्रम रचा, जिससे युद्धस्थल विचलित हो गया। फिर वह स्वयं शिव का रूप धारण कर माता पार्वती के पास पहुँचा। उसका उद्देश्य पार्वती की मर्यादा भंग करना था, पर आदिशक्ति पार्वती ने तुरंत पहचान लिया कि यह शिव नहीं, जालंधर है। वह वहाँ से अंतर्ध्यान हो गईं और फिर विष्णु से वृंदा के सतीत्व को तोड़ने का उपाय करने को कहा।
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