विस्तृत उत्तर
शिवजी ने पार्वतीजी को राम अवतार के अनेक कारण बताये, पर साथ ही कहा कि कारणों की संख्या निश्चित नहीं कही जा सकती।
शिवजी ने कहा — 'हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई॥' — हरि के अवतार का कारण 'बस इतना ही है' ऐसा कहा ही नहीं जा सकता।
फिर भी जो प्रमुख कारण बताये वे हैं:
- 1धर्म की हानि और असुरों का बढ़ना
- 2ब्राह्मण-गौ-देवता-पृथ्वी की पीड़ा
- 3जय-विजय का शाप — विष्णुलोक के द्वारपालों को सनकादि ऋषियों ने शाप दिया
- 4नारदजी का शाप — नारदजी ने भगवान को शाप दिया कि मनुष्य बनो और स्त्री-विरह सहो
- 5मनु-शतरूपा का वरदान — उन्होंने 'तुम सम पुत्र' (आप जैसा पुत्र) माँगा
- 6प्रतापभानु की कथा — ब्राह्मणों के शाप से वह रावण बना
- 7भक्तों का प्रेम — 'भगत हेतु भगवान प्रभु राम धरेउ तनु भूप'
इस प्रकार शिवजी ने अनेक कारण बताये, पर कहा कि ये अनन्त हैं — सब कारण गिनाये नहीं जा सकते।





