विस्तृत उत्तर
तांत्रिक/शाक्त दर्शन = स्त्री ही परब्रह्म
दार्शनिक आधार
- 1शिव-शक्ति सिद्धांत: शिव = चेतना (consciousness), शक्ति = ऊर्जा (energy)। बिना शक्ति शिव = 'शव' (मृत शरीर)। शक्ति = सृष्टि का मूल कारण।
- 2देव्युपनिषद: देवी कहती हैं: 'अहं ब्रह्मास्मि' — मैं ही ब्रह्म हूं। 'अहमेव वात इव प्रवाम्यारभमाणा भूवनानि विश्वा' — मैं ही वायु की तरह सभी लोकों में प्रवाहित।
- 3शाक्तोपनिषद शोध: 'शक्तिः न केवलं स्त्रीत्वस्य प्रतीकं किन्तु सर्वस्य जगतः मूलभूतं चैतन्यमेव अस्ति' — शक्ति केवल स्त्रीत्व प्रतीक नहीं, समस्त जगत का मूल चैतन्य।
स्त्री = शक्ति क्यों
- 1सृजन शक्ति: स्त्री = जीवन देने वाली (माता) — सृष्टि का मूल।
- 2पोषण शक्ति: माता = अन्नपूर्णा — पोषण/रक्षा।
- 3प्रेरणा शक्ति: शक्ति (स्त्री) शिव (पुरुष) को क्रियाशील बनाती है।
- 4कुण्डलिनी: कुण्डलिनी शक्ति = स्त्री शक्ति (feminine energy) — मूलाधार से सहस्रार तक।
- 5प्रत्येक स्त्री में देवी: तंत्र: प्रत्येक स्त्री = देवी का अंश। स्त्री अपमान = देवी अपमान।
सार: तंत्र = विश्व का एकमात्र दर्शन जहां ब्रह्म (सर्वोच्च सत्ता) = स्त्री (शक्ति) — पुरुष = गौण।


