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तंत्र शास्त्र⏱ 2 मिनट पठन

तंत्र शास्त्र में स्त्री को शक्ति स्वरूप क्यों माना गया

शिव-शक्ति: बिना शक्ति शिव='शव'। देव्युपनिषद: 'अहं ब्रह्मास्मि' (देवी=ब्रह्म)। शाक्तोपनिषद: शक्ति=जगत का मूल चैतन्य। क्यों: सृजन (माता), पोषण, प्रेरणा, कुण्डलिनी=स्त्री शक्ति। प्रत्येक स्त्री=देवी अंश।

संक्षिप्त उत्तर

शिव-शक्ति: बिना शक्ति शिव='शव'। देव्युपनिषद: 'अहं ब्रह्मास्मि' (देवी=ब्रह्म)। शाक्तोपनिषद: शक्ति=जगत का मूल चैतन्य। क्यों: सृजन (माता), पोषण, प्रेरणा, कुण्डलिनी=स्त्री शक्ति। प्रत्येक स्त्री=देवी अंश। तंत्र=एकमात्र — ब्रह्म=स्त्री।

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विस्तृत उत्तर

तांत्रिक/शाक्त दर्शन = स्त्री ही परब्रह्म

दार्शनिक आधार

  1. 1शिव-शक्ति सिद्धांत: शिव = चेतना (consciousness), शक्ति = ऊर्जा (energy)। बिना शक्ति शिव = 'शव' (मृत शरीर)। शक्ति = सृष्टि का मूल कारण।
  2. 2देव्युपनिषद: देवी कहती हैं: 'अहं ब्रह्मास्मि' — मैं ही ब्रह्म हूं। 'अहमेव वात इव प्रवाम्यारभमाणा भूवनानि विश्वा' — मैं ही वायु की तरह सभी लोकों में प्रवाहित।
  3. 3शाक्तोपनिषद शोध: 'शक्तिः न केवलं स्त्रीत्वस्य प्रतीकं किन्तु सर्वस्य जगतः मूलभूतं चैतन्यमेव अस्ति' — शक्ति केवल स्त्रीत्व प्रतीक नहीं, समस्त जगत का मूल चैतन्य।

स्त्री = शक्ति क्यों

  1. 1सृजन शक्ति: स्त्री = जीवन देने वाली (माता) — सृष्टि का मूल।
  2. 2पोषण शक्ति: माता = अन्नपूर्णा — पोषण/रक्षा।
  3. 3प्रेरणा शक्ति: शक्ति (स्त्री) शिव (पुरुष) को क्रियाशील बनाती है।
  4. 4कुण्डलिनी: कुण्डलिनी शक्ति = स्त्री शक्ति (feminine energy) — मूलाधार से सहस्रार तक।
  5. 5प्रत्येक स्त्री में देवी: तंत्र: प्रत्येक स्त्री = देवी का अंश। स्त्री अपमान = देवी अपमान।

सार: तंत्र = विश्व का एकमात्र दर्शन जहां ब्रह्म (सर्वोच्च सत्ता) = स्त्री (शक्ति) — पुरुष = गौण।

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स्त्री = शक्ति क्यों

1. सृजन शक्ति: स्त्री = जीवन देने वाली (माता) — सृष्टि का मूल। 2. पोषण शक्ति: माता = अन्नपूर्णा — पोषण/रक्षा। 3. प्रेरणा शक्ति: शक्ति (स्त्री) शिव (पुरुष) को क्रियाशील बनाती है। 4. कुण्डलिनी: कुण्डलिनी शक्ति = स्त्री शक्ति (feminine energy) — मूलाधार से सहस्रार तक। 5. प्रत्येक स्त्री में देवी: तंत्र: प्रत्येक स्त्री = देवी का अंश।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

तंत्र शास्त्र में स्त्री को शक्ति स्वरूप क्यों माना गया है को संदर्भ सहित समझें

तंत्र शास्त्र में स्त्री को शक्ति स्वरूप क्यों माना गया है का सबसे सीधा सार यह है: शिव-शक्ति: बिना शक्ति शिव='शव'। देव्युपनिषद: 'अहं ब्रह्मास्मि' (देवी=ब्रह्म)। शाक्तोपनिषद: शक्ति=जगत का मूल चैतन्य। क्यों: सृजन (माता), पोषण, प्रेरणा, कुण्डलिनी=स्त्री शक्ति। प्रत्येक स्त्री=देवी अंश। तंत्र=एकमात्र — ब्रह्म=स्त्री।

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