विस्तृत उत्तर
प्रायश्चित्त (सुधार) विधि
1क्षमा प्रार्थना (सरलतम)
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि। यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे।।
+ 'अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम्। तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि।।'
2. अतिरिक्त जप: गलती सुधार हेतु निर्धारित मंत्र का अतिरिक्त 108/1008 जप।
3. हवन: प्रायश्चित्त हवन — घी + तिल + इष्ट मंत्र।
4. दान: ब्राह्मण भोजन, अन्नदान, वस्त्र दान।
5. गुरु परामर्श: गुरु = सही प्रायश्चित्त बताएं — गलती की गंभीरता अनुसार।
6. पुनः आरंभ: यदि अनुष्ठान अधूरा → शुद्धि → पुनः संकल्प → पुनः आरंभ।
भगवान = कृपालु: गलती = मानवीय। भगवान दंड नहीं देते — सच्ची क्षमा भावना = सब ठीक। 'अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि।।'