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तंत्र शास्त्र📜 तंत्र शास्त्र, क्षमा प्रार्थना, पूजा विधि1 मिनट पठन

तंत्र साधना में गलती होने पर प्रायश्चित्त कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

क्षमा प्रार्थना ('मन्त्रहीनं...परिपूर्णं तदस्तु मे'), अतिरिक्त 108/1008 जप, प्रायश्चित्त हवन, दान/ब्राह्मण भोजन, गुरु परामर्श, पुनः आरंभ। भगवान = कृपालु, दंड नहीं — सच्ची क्षमा = सब ठीक।

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विस्तृत उत्तर

प्रायश्चित्त (सुधार) विधि

1क्षमा प्रार्थना (सरलतम)

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि। यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे।।

+ 'अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम्। तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि।।'

2. अतिरिक्त जप: गलती सुधार हेतु निर्धारित मंत्र का अतिरिक्त 108/1008 जप।

3. हवन: प्रायश्चित्त हवन — घी + तिल + इष्ट मंत्र।

4. दान: ब्राह्मण भोजन, अन्नदान, वस्त्र दान।

5. गुरु परामर्श: गुरु = सही प्रायश्चित्त बताएं — गलती की गंभीरता अनुसार।

6. पुनः आरंभ: यदि अनुष्ठान अधूरा → शुद्धि → पुनः संकल्प → पुनः आरंभ।

भगवान = कृपालु: गलती = मानवीय। भगवान दंड नहीं देते — सच्ची क्षमा भावना = सब ठीक। 'अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि।।'

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र, क्षमा प्रार्थना, पूजा विधि
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