तंत्र शास्त्रतंत्र साधना में गलती होने पर प्रायश्चित्त कैसे करें?
क्षमा प्रार्थना ('मन्त्रहीनं...परिपूर्णं तदस्तु मे'), अतिरिक्त 108/1008 जप, प्रायश्चित्त हवन, दान/ब्राह्मण भोजन, गुरु परामर्श, पुनः आरंभ। भगवान = कृपालु, दंड नहीं — सच्ची क्षमा = सब ठीक।
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