विस्तृत उत्तर
देवी अपराधक्षमापन स्तोत्र = आदि शंकराचार्य रचित — माँ से ज्ञात-अज्ञात अपराधों की क्षमा याचना।
कब: नवरात्रि अंतिम दिन(दशहरा), दुर्गा सप्तशती पूर्ण होने पर, पूजा में कोई भूल/त्रुटि हुई हो, माता से क्षमा माँगनी हो, प्रतिदिन भी शुभ।
*'न मंत्रं नो यंत्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो, न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः'*
= न मंत्र जानता, न यंत्र, न ध्यान — हे माँ, मेरी अज्ञानता क्षमा करो।
लाभ: सभी पूजा त्रुटियों की क्षमा, माता कृपा, अपराध शांति, भक्ति शुद्धि।
विशेष: किसी भी पूजा/अनुष्ठान के अंत में पढ़ें — सभी भूलों की क्षमा स्वतः।





