विस्तृत उत्तर
शिव पूजा के बाद क्षमा प्रार्थना के लिए सबसे प्रसिद्ध मंत्र/स्तोत्र:
1शिव अपराध क्षमापन स्तोत्र (आदि शंकराचार्य रचित)
यह सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली क्षमा प्रार्थना है। प्रत्येक श्लोक का अंत 'क्षन्तव्यो मेऽपराधः शिव शिव शिव भो श्रीमहादेव शम्भो' से होता है — 'हे शिव! हे महादेव! हे शम्भो! मेरा अपराध क्षमा करो!'
इसमें भक्त अपने जन्म से लेकर वर्तमान तक के सभी ज्ञात-अज्ञात अपराधों, पूजा में हुई त्रुटियों और अज्ञानवश किए गए दोषों के लिए शिव से क्षमा मांगता है।
2सामान्य क्षमा श्लोक (संक्षिप्त)
कराचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा। श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्। विहितमविहितं वा सर्वमेतत् क्षमस्व। जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥
अर्थ: 'हाथों से, पैरों से, वाणी से, शरीर से, कर्म से, कानों से, नेत्रों से या मन से भी जो अपराध किए हों — विहित (उचित) हों या अविहित (अनुचित) — उन सबको हे करुणा सागर महादेव शम्भो, क्षमा कीजिए। आपकी जय हो!'
कब पढ़ें
- ▸प्रत्येक शिव पूजा के अंत में, आरती के बाद।
- ▸विसर्जन से ठीक पहले।
- ▸मंत्र जप अनुष्ठान पूर्ण होने पर।
महत्व (शोध — SriKubereshwarDham)
शंकराचार्य रचित यह स्तोत्र पूजा में रह गई सभी न्यूनताओं को पूर्ण करता है। इसके नियमित पाठ से मानसिक शांति और शिव कृपा प्राप्त होती है।





