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देवी स्तोत्र📜 दुर्गा सप्तशती (उपांग), शाक्त परंपरा1 मिनट पठन

देवी अपराधक्षमापन स्तोत्र का पाठ कब करें?

संक्षिप्त उत्तर

सप्तशती पाठ अंत में (अनिवार्य)। व्रत टूटने/त्रुटि पर। प्रतिदिन संध्या। 'न मंत्रं नो यंत्रं... परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम्' — शरण = क्लेश हरण।

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विस्तृत उत्तर

अपराधक्षमापन स्तोत्र = देवी से क्षमा याचना:

कब पढ़ें

  1. 1दुर्गा सप्तशती पाठ के अंत में — अनिवार्य (AajTak verified: 'क्षमा प्रार्थना अवश्य करें')।
  2. 2व्रत टूटने पर — प्रायश्चित।
  3. 3पूजा में त्रुटि होने पर — अशुद्ध उच्चारण, नियम भंग।
  4. 4प्रतिदिन संध्या — दैनिक क्षमा (उत्तम अभ्यास)।
  5. 5अनुष्ठान समापन पर।

प्रसिद्ध श्लोक: 'न मंत्रं नो यंत्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो। न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः। न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनम्। परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम्॥'

— 'न मंत्र जानता हूं, न यंत्र, न स्तुति — बस इतना जानता हूं कि आपकी शरण = क्लेश हरण।'

लाभ: अज्ञानवश हुए अपराधों से मुक्ति, देवी कृपा अक्षुण्ण।

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शास्त्रीय स्रोत
दुर्गा सप्तशती (उपांग), शाक्त परंपरा
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