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दुर्गा स्तोत्र📜 मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती — देवी कवचम्)1 मिनट पठन

दुर्गा कवच का पाठ करने से कैसी सुरक्षा मिलती है?

संक्षिप्त उत्तर

शरीर के प्रत्येक अंग पर देवी का रक्षा कवच। 6 दिशाओं से सुरक्षा। नकारात्मक ऊर्जा, तांत्रिक बाधा, ग्रह दोष, शत्रु, भय से मुक्ति। सप्तशती में अनिवार्य। स्वतंत्र दैनिक पाठ भी शुभ।

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विस्तृत उत्तर

देवी कवचम् (दुर्गा सप्तशती का अंग) — शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा:

सुरक्षा

  • शारीरिक: मस्तक = चंडिका, ललाट = शूलधारिणी, नेत्र = खड्गिनी... प्रत्येक अंग पर देवी का एक रूप रक्षा करता है।
  • सर्वदिक्: पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण + ऊर्ध्व-अधो — छह दिशाओं से सुरक्षा।
  • नकारात्मक ऊर्जा: तांत्रिक प्रयोग, बुरी नजर, भूत-प्रेत बाधा से रक्षा।
  • ग्रह दोष: राहु-केतु-शनि आदि अशुभ प्रभाव से।
  • शत्रु: षड्यंत्र, कानूनी विवाद, कार्यक्षेत्र बाधा।
  • मानसिक: भय, चिंता, अवसाद से मुक्ति।

पाठ: दुर्गा सप्तशती पाठ आरंभ में अनिवार्य। स्वतंत्र रूप से भी प्रतिदिन पाठ शुभ।

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शास्त्रीय स्रोत
मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती — देवी कवचम्)
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