विस्तृत उत्तर
देवी कवचम् (दुर्गा सप्तशती का अंग) — शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा:
सुरक्षा
- ▸शारीरिक: मस्तक = चंडिका, ललाट = शूलधारिणी, नेत्र = खड्गिनी... प्रत्येक अंग पर देवी का एक रूप रक्षा करता है।
- ▸सर्वदिक्: पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण + ऊर्ध्व-अधो — छह दिशाओं से सुरक्षा।
- ▸नकारात्मक ऊर्जा: तांत्रिक प्रयोग, बुरी नजर, भूत-प्रेत बाधा से रक्षा।
- ▸ग्रह दोष: राहु-केतु-शनि आदि अशुभ प्रभाव से।
- ▸शत्रु: षड्यंत्र, कानूनी विवाद, कार्यक्षेत्र बाधा।
- ▸मानसिक: भय, चिंता, अवसाद से मुक्ति।
पाठ: दुर्गा सप्तशती पाठ आरंभ में अनिवार्य। स्वतंत्र रूप से भी प्रतिदिन पाठ शुभ।





