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मंदिर अनुष्ठान📜 आगम शास्त्र, दक्षिण मंदिर परंपरा1 मिनट पठन

मंदिर में कुंभाभिषेक क्या होता है और कब कराते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

मंदिर 'पुनर्जीवन'। कलश जल → शिखर/कलश/मूर्ति अभिषेक। निर्माण बाद (अनिवार्य), 12 वर्ष (दक्षिण), जीर्णोद्धार। 45-48 दिन → 1008 कलश → शिखर अभिषेक। दक्षिण = अत्यंत भव्य।

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विस्तृत उत्तर

कुंभाभिषेक = मंदिर 'पुनर्जीवन' अनुष्ठान:

क्या है: 'कुंभ' (कलश) + 'अभिषेक' (स्नान) = पवित्र कलश जल से मंदिर शिखर/कलश/मूर्ति का अभिषेक। मंदिर को 'पुनः जीवित' करना।

कब

  1. 1प्रथम: मंदिर निर्माण पूर्ण → प्राण प्रतिष्ठा + कुंभाभिषेक = अनिवार्य।
  2. 2नियमित: प्रत्येक 12 वर्ष (दक्षिण = अनिवार्य)। या जीर्णोद्धार बाद।
  3. 3विशेष: शिखर मरम्मत, बिजली गिरना, अशुभ घटना बाद।

विधि (संक्षिप्त): 45-48 दिन अनुष्ठान → यज्ञ → 1008 कलश जल → शिखर कलश अभिषेक → प्राण प्रतिष्ठा → भोग → आरती।

दक्षिण विशेष: तमिलनाडु = कुंभाभिषेक = अत्यंत भव्य। लाखों खर्च। समाचार।

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शास्त्रीय स्रोत
आगम शास्त्र, दक्षिण मंदिर परंपरा
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