📖
विस्तृत उत्तर
हाँ — सुनना भी लाभकारी।
शास्त्रीय: नवधा भक्ति — *'श्रवणं कीर्तनं विष्णोः'* — श्रवण(सुनना) = भक्ति का प्रथम मार्ग।
लाभ: वातावरण शुद्धि, मानसिक शांति, भय कम, नकारात्मकता दूर, सकारात्मक ऊर्जा, बच्चों/बीमारों के लिए (स्वयं न पढ़ सकें)।
पर: स्वयं पढ़ना > सुनना। पढ़ना = उच्चारण+ध्वनि+प्राण+एकाग्रता = पूर्ण प्रभाव। सुनना = आंशिक (श्रवण भक्ति)।
व्यावहारिक: ड्राइविंग/कुकिंग/व्यायाम करते = सुनें। पूजा समय = स्वयं पढ़ें। कुछ न करने से सुनना 100x बेहतर।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





