विस्तृत उत्तर
हंस गीता में क्षमा को मोक्षमार्ग का अत्यंत महत्वपूर्ण गुण माना गया है। महाभारत शांति पर्व के हंस उपदेश में कहा गया है कि साधक को अपमान, कठोर वचन और आघात सहकर भी प्रतिशोध नहीं रखना चाहिए। क्षमा का अर्थ कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मसंयम और अहंकार-क्षय है। जो व्यक्ति हर चोट पर प्रतिक्रिया देता है, वह मन और विषयों के चक्र में बंधा रहता है। जो क्षमा कर सकता है, वह अपने भीतर स्थित साक्षी भाव के निकट पहुँचता है। इसीलिए हंस गीता सत्य, संयम और क्षमा को मोक्षधर्म के आधार के रूप में स्थापित करती है।
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