तंत्र शास्त्रतंत्र में पूर्णाहुति का क्या अर्थ है?पूर्णाहुति = हवन की अंतिम/सम्पूर्ण आहुति। नारियल+घी+खीर+मेवे = एक साथ। मंत्र: 'ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं...' (ईशावास्य) + 'स्वाहा'। अर्थ: सर्वसमर्पण ('इदं न मम')। बिना पूर्णाहुति = हवन अपूर्ण।#पूर्णाहुति#हवन#समापन
पूर्णाहुति और समापनवसोर्धारा क्या है?वसोर्धारा = वृहद् यज्ञों में पूर्णाहुति के समय स्रुवा से लगातार बिना टूटे घी की एक अखंड धार अग्नि में अर्पित करना। मंत्र: 'ॐ वसोः पवित्रमसि शतधारं वसोः पवित्रमसि सहस्रधारं... स्वाहा।'#वसोर्धारा#अखंड घी धार
पूर्णाहुति और समापनपूर्णाहुति क्या है और कैसे करते हैं?पूर्णाहुति = हवन का अंतिम और सर्वोच्च चरण। सम्पूर्ण बची हवन सामग्री + घी + पान + सुपारी + लौंग + इलायची + सूखा नारियल एक साथ वेदी में समर्पित। मंत्र: 'ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं...' — 3 बार। नारियल = अहंकार का विसर्जन।#पूर्णाहुति#विराट पूर्णता#नारियल
पूजा विधिशिव जी की क्षमा प्रार्थना मंत्र?पूजा के अंत में 'करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा...' मंत्र बोलकर शिव जी से अपने शरीर, वाणी या मन से हुई सभी गलतियों की माफी मांगनी चाहिए।#क्षमा प्रार्थना#पूर्णाहुति#महादेव शम्भो
मंदिर अनुष्ठानमंदिर में यज्ञ करवाने का क्या विधान है?यज्ञ विधान: प्रकार चुनें (गणपति/नवग्रह/रुद्र)। मंदिर से सम्पर्क → मुहूर्त → पुरोहित। विधि: कुंड निर्माण → कलश → संकल्प → अग्नि स्थापना → आहुति (108/1008, 'स्वाहा') → पूर्णाहुति → शान्ति पाठ → भोजन+दक्षिणा। अवधि: 1-9 दिन। अग्नि सुरक्षा + ब्रह्मचर्य + सात्विक आहार।#यज्ञ#हवन#अग्निहोत्र