विस्तृत उत्तर
विशिष्ट अनुष्ठानों और वृहद् यज्ञों में पूर्णाहुति के समय 'वसोर्धारा' दी जाती है। इसमें स्रुवा की सहायता से लगातार बिना टूटे घी की एक धार अग्नि में अर्पित की जाती है।
इसका मंत्र है: 'ॐ वसोः पवित्रमसि शतधारं वसोः पवित्रमसि सहस्रधारं... स्वाहा।'





