विस्तृत उत्तर
मानव स्वभाव वश यज्ञ करते समय मंत्रों के उच्चारण में, सामग्री की मात्रा में, या यज्ञीय विधि में कोई न्यूनता (कमी) या अधिकता रह सकती है। उस त्रुटि के निवारण और प्रायश्चित्त के लिए 'स्विष्टकृत्' आहुति दी जाती है। यह आहुति प्रायः मिष्ठान, खीर या भात (ओदन) से दी जाती है।
मन्त्र: 'ॐ यदस्य कर्मणोऽत्यरीरिचं यद्वा न्यूनमिहाकरम्। अग्निष्टत्स्विष्टकृद्विद्यात् सर्वं स्विष्टं सुहुतं करोतु मे। अग्नये स्विष्टकृते सुहुतहुते सर्वप्रायश्चित्ताहुतीनां कामानां समर्द्धयित्रे सर्वान्नः कामान्त्समर्द्धय स्वाहा। इदमग्नये स्विष्टकृते इदन्न मम॥'
भावार्थ: हे स्विष्टकृत् (उत्तम रूप से यज्ञ संपन्न कराने वाले) अग्निदेव! इस कर्म में मैंने जो कुछ अधिक कर दिया हो या जो न्यून रह गया हो, आप उसे पूर्ण कर दें। मेरे सभी प्रायश्चित्तों को स्वीकार कर मेरी कामनाओं को पूर्ण करें।





