जप नियममंत्र जप के बाद 'क्षमा प्रार्थना' क्यों जरूरी हैजप या पूजा में अनजाने में हुए उच्चारण, विधि या ध्यान के दोषों को मिटाने और अपने अहंकार को नष्ट करने के लिए अंत में क्षमा प्रार्थना करना अनिवार्य है, तभी अनुष्ठान पूर्ण होता है।#क्षमा प्रार्थना#त्रुटि निवारण#अहंकार नाश
पूर्णाहुति और समापनस्विष्टकृत् आहुति क्या है?स्विष्टकृत् आहुति = हवन में हुई किसी भी त्रुटि (मंत्र, सामग्री, विधि) के प्रायश्चित्त की आहुति। मिष्ठान, खीर या भात से दी जाती है। मंत्र: 'ॐ यदस्य कर्मणोऽत्यरीरिचं यद्वा न्यूनमिहाकरम्...' अर्थ: हे अग्निदेव! जो अधिक या न्यून हुआ, उसे पूर्ण करें।
साधना के चरणपूजा में गलती होने पर क्या करें?पूजा में किसी भी ज्ञात या अज्ञात त्रुटि के लिए अंत में देवता से क्षमा प्रार्थना अनिवार्य है — यह साधना की पूर्णाहुति का अंग है।#क्षमा प्रार्थना#त्रुटि निवारण#पूजा भूल