का सरल उत्तर
स्विष्टकृत् आहुति = हवन में हुई किसी भी त्रुटि (मंत्र, सामग्री, विधि) के प्रायश्चित्त की आहुति। मिष्ठान, खीर या भात से दी जाती है। मंत्र: 'ॐ यदस्य कर्मणोऽत्यरीरिचं यद्वा न्यूनमिहाकरम्...' अर्थ: हे अग्निदेव! जो अधिक या न्यून हुआ, उसे पूर्ण करें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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