विस्तृत उत्तर
शास्त्रीय मान्यता है कि यदि हवन के पश्चात आसन के नीचे जल लगाकर इन्द्र वंदन न किया जाए, तो देवराज इन्द्र उस यज्ञ का सम्पूर्ण पुण्य फल हर लेते हैं।
इसके पश्चात भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगी जाती है:
ॐ प्रमादात् कुर्वतां कर्म प्रच्यवेताध्वरेषु यत्। स्मरणादेव तद्विष्णोः सम्पूर्णं स्यादिति श्रुतिः॥





