विस्तृत उत्तर
पद्म पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार, यह व्रत सुमेरु पर्वत जैसे विशाल पापों (गौ-हत्या, ब्रह्म-हत्या) को नष्ट करने की शक्ति रखता है। यह मनुष्य को अनुचित आसक्ति (मोह-माया) से मुक्त कर विवेक जगाता है। इस व्रत को करने से एक हज़ार गौदान और अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। इसका पुण्य पितरों को देने से वे नीच योनियों से मुक्त होते हैं, मानसिक अवसाद (Depression) दूर होता है और अंत में व्यक्ति विष्णुलोक (बैकुंठ) को प्राप्त करता है।




