का सरल उत्तर
यह व्रत सुमेरु पर्वत जितने बड़े पापों को भी नष्ट कर देता है। इसे करने से 1000 गायों के दान और अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है और पितरों को शांति मिलती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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