विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार, अनन्त व्रत को लगातार 14 वर्षों तक करने का विधान है। 14 वर्ष पूरे होने पर व्रत का 'उद्यापन' करना अनिवार्य होता है ताकि व्रत का सम्पूर्ण फल स्थिर हो सके। इसमें 14 कलशों की स्थापना कर हवन किया जाता है और 14 ब्राह्मणों को भोजन व दान-दक्षिणा दी जाती है।





