विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में दान का वर्णन एक सोचे-समझे शास्त्रीय प्रयोजन से है।
प्रेत-मुक्ति का साधन — प्रेतकल्प का मूल विषय प्रेत-मुक्ति है। और दान ही प्रेत-मुक्ति का सर्वोत्तम साधन है। गरुड़ पुराण में — 'दान-दक्षिणा, पिंडदान तथा श्राद्ध कर्म — ये प्रेत योनि और नरक से बचाने के प्रमुख उपाय हैं।'
जीवनकाल में दान — यमदूत नरक में पापियों से जो प्रश्न पूछते हैं — 'अन्न और जल का दान क्यों नहीं दिया?' — यह वर्णन इसीलिए है कि जीवित रहते दान करें।
परिजनों के कर्तव्य को बताना — मृत्यु के बाद परिजनों द्वारा किया गया दान (पिंडदान, शय्यादान, गोदान) प्रेत को शरीर, शक्ति और मुक्ति देता है। यह दायित्व-बोध कराना प्रेतकल्प का उद्देश्य है।
यमलोक की वास्तविकता — गरुड़ पुराण में — 'पृथ्वी पर मनुष्यों के द्वारा जो-जो दान दिये जाते हैं, यमलोक के मार्ग में वे सभी आगे-आगे उपस्थित हो जाते हैं।' यह वर्णन दान की वास्तविकता सिद्ध करने के लिए है।
आत्मज्ञान की ओर — अंततः दान का वर्णन इसलिए है कि मनुष्य भोग-विलास से हटकर त्याग और सेवा की ओर जाए।





